Lyrics
नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव।
नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव।
माया के इस रंगमंच पर, हर अभिनय क्षणभंगुर है,
जीत का घमंड भी खोखला यहाँ, हार का शोक भी आतुर है।
सफलता की इस अंधी दौड़ में, जो शीर्ष पर है वो भी रोता,
शून्य से उपजा, शून्य में विलीन, फिर कौन हारा और कौन जीता?
विधि का विधान, काल की गति, सब उस महादेव के अधीन है,
तेरी नियति, तेरी लकीरें, महाकाल के मस्तक पर विलीन हैं।
काल का चक्र, समय की चाल, सब महादेव के बस में है,
तेरी किस्मत का हर पन्ना, महाकाल के ही हक में है।
यहाँ जीवन का प्रथम प्रलाप, और श्मशान का वो अंतिम मौन,
दोनों छोर को जो थामे है, उस अघोरी के सिवा है कौन?
समय का पहिया, जीवन की गति, सब महादेव के हाथ है,
तेरी किस्मत, तेरी लकीरें, सब महाकाल के साथ है।
साम्राज्य तेरा क्षणिक यहाँ, कल भस्म की ढेरी बन जाना,
अहंकार की इस कूटनीति को, एक दिन मिट्टी में मिल जाना।
औकात समझ ओ मिट्टी के पुतले, महाकाल का वो दरबार है,
तेरी हस्ती एक कतरे जैसी, तू तो बस एक किरदार है!
सर्व भी तू! सर्वस्व भी तू! इस जीवन का मर्म भी तू!
दाता भी तू! विधाता भी तू! नियति का प्रखर कर्म भी तू!
तू देने वाला, तू लेने वाला, इस ब्रह्मांड को गति देने वाला,
तू परम सत्य, हम मात्र भ्रम, तू दिव्य चेतना, हम केवल तम!
भगवान भी तू, इंसान हैं हम, तेरी माया के अधीन प्राण हैं हम,
शिव भी तू है, सुंदर भी तू, शून्य और अनंत का समंदर भी तू।
सब कुछ तू है, मैं कुछ भी नहीं, इस मिथ्या वजूद की बिसात नहीं,
वैभव भी तेरा, पराभव भी तेरा, इस मिट्टी की काया में क्या है मेरा?
सांस भी तू! श्मशान भी तू! आदि और अनंत का प्रमाण भी तू!
अहंकार को भस्म कर शीश झुकाए, हर हर महादेव का नाद गूंज जाए!
राख होगी काया, राख होगा घमंड,
जहाँ अंत है सब, वहीं शिव का आरंभ...
अंतः अस्ति प्रारंभः।
नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव।
नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव।