Ye Shehar

जहाँ हर मोड़, किसी अधूरी कहानी का पता जानता है। — प्रयागराज के नाम एक नज़्म।

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Ye Shehar — a verse for Prayagraj, hand-lettered over a Ganga-ghat sunset.

एक उमर बीती है यहाँ

हर गली हर मोड़
हर नुक्कड़ हर चौराहा में
एक कहानी, एक रवानगी
बयान होती है यहाँ

दोस्ती तो दोस्ती,
दुश्मनी भी सर आँखों पर
रखी जाती है यहाँ

हाँ कुछ भीड़ ज्यादा हो गई है
कुछ आवाज़ों से
कुछ सन्नाटों से

हादसे अब
आवाज़ नहीं
किया करते यहाँ

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