लगेगा नहीं

उमेर नजमी का एक शेर, जो दिल से लगा — “बिछड़ गए तो ये दिल ’उम्र भर लगेगा नहीं…”

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बिछड़ गए तो ये दिल ’उम्र भर लगेगा नहीं — उमेर नजमी का शेर, एक शहर के ग़ुरूब पर।

बिछड़ गए तो ये दिल ’उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं

नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है
मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं

— उमेर नजमी

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